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भारतीय वैदिक संस्कार का महत्व— श्री स्वामी जी महाराज

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श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर हुलासगंज के मठाधीश श्री स्वामी रंग रामानुजाचार्य जी महाराज इन दिनों सोशल मीडिया एवं समाचार पत्र के माध्यम से अच्छी, आचरणीय बातों का उपदेश कर रहे हैं। उन्होंने आज के प्रसंग में कहां कि पापों को दूर करने के लिए वेदों तथा त्रिकालदर्शी तत्ववेत्ता ऋषियों ने संस्कार का विधान किया है। संस्कार का अर्थ होता है- दुर्गुणों को हटाकर अच्छे गुणों को उत्पन्न कर देना। संस्कार से जीवात्मा में उत्तम गुण आते हैं। उनके दुर्गुणों तथा पापों का नाश हो जाता है। व्यास स्मृति के अनुसार सोलह संस्कार होते हैं। जिसमें कुछ महत्वपूर्ण संस्कार होते हैं। जैसे चूड़ाकरण, यज्ञोपवीत, विवाह इत्यादि। चूड़ाकरण संस्कार प्रथम या तृतीय वर्ष में होता है। चूड़ा का अर्थ है चोटी या शिखा। जन्म लेने पर सिर के सारे बाल समान रहते हैं। सिर पर शिखा भर बाल छोड़कर शेष केश कटवा दिये जाते हैं।

शिखा रखने के कारण इस संस्कार का नाम चूड़ाकरण है। कुछ लोग चूड़ाकरण का अर्थ न जानने के कारण मुंडन के समय सभी केसों को कटवा देते हैं। ऐसी भूल कभी नहीं करनी चाहिए। ज्ञान न रहने के कारण समझते हैं कि केश अपवित्र होता है। अतः सब केश कटवा देना चाहिए। परन्तु यह सबसे बड़ी भूल है। गर्भस्थ केशों को अपवित्र होने के कारण चूड़ाकर्म नहीं होता, बल्कि गर्भस्थ शिशु के समान होने से सीखा भर केश को छोड़कर सबोंको कटवा कर शिखावान् बनाया जाता है। शिखा धारण से एक महान लाभ यह है कि सिर पर शिखा बांधकर जो भी पुण्य कर्म करते हैं, वह पूर्ण सफल होता है। शिखा विहीन व्यक्तियों के द्वारा किए हुए सारे धार्मिक कर्म निष्फल होते हैं। विद्यार्थी जीवन में शिखा रखकर पढ़ने मैं बुद्धि तीव्र कार्य करती है। अध्ययन गति तीव्र होती है तथा बुद्धि में सकारात्मकता बनी रहती है।

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