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राजनीति कैसा हो यह उपदेश श्री राम ने भरत जी को दिया उपदेश – श्री स्वामी जी महाराज

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लक्ष्मी नारायण मंदिर हुलासगंज जहानाबाद के मठाधीश श्री स्वामी रंग रामानुजाचार्य जी महाराज इन दिनों सोशल मीडिया एवं समाचार पत्र माध्यम से भक्तों के लिए भगवान का गुणगान बखान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब भरत श्री राम जी को लौटाने के लिए चित्रकूट आए, तब भगवान श्री राम भरत को निमित्त बनाकर निमित्त बनाकर राजनीति का संपूर्ण उपदेश किया। उन्होंने कहा कि राजा को चाहिए कि देवताओं, पितरों, गुरुजनों, वृद्धों, वैद्य, और ब्राह्मणों का सम्मान करे। वह नियत समय पर सोए और जागे। रात्रि के अंतिम समय में अर्थ सिद्धि के उपाय पर विचार करे। किसी भी गुप्त मंत्रणा को अकेले अथवा अधिक लोगों के साथ विचार ना करे। अधिक लोगों के साथ विचार करने पर बात शत्रु तक फैल जाती है।

विद्वान को ही मंत्री बनाए। उनसे सदा उत्तम सहयोग व परामर्श मिलता है। मूर्ख को कभी भी मंत्री ना बनाए, और ना ही अपने पास रखे। उससे राजा को हानि होती है। हजारों मुर्खों से राष्ट्र का हित नहीं होता, लेकिन एक मेधावी, शूरवीर, चतुर एवं नीतिज्ञ मंत्री राष्ट्र को संपन्न बना सकता है। उत्तम, मध्यम और छोटी श्रेणी के लोगों को राजा यथा योग्य स्थान पर नियुक्त करे। राजा वैसे मंत्री को उत्तम कार्य में लगाए जो रिश्वत नहीं लेता हो, निश्चल हो, बाहर भीतर से पवित्र हो तथा उसके पूर्वज कार्य कुशल रहे हों। मंत्री गण प्रजा को अधिक कठोर सजा ना दे। प्रजा पर अधिक कर ना लगाए। क्योंकि उससे उद्विग्न होकर प्रजा राजा का तिरस्कार कर देती है सेनापति शूरवीर धैर्यवान, बुद्धिमान, उत्साही एवं युद्धकला में दक्ष हो। राजा को चाहिए की सैनिकों एवं अन्य कर्मचारियों को वेतन एवं भत्ता नियत समय पर दे।

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