राजा को सत्य का पालन करना ही सनातन धर्म है— श्री स्वामी जी महाराज

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Sri lakshmi narayan mandir

श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर हुलासगंज के मठाधीश श्री स्वामी रंग रामानुजाचार्य जी महाराज का इन दिनों सोशल मीडिया वह समाचार पत्र के माध्यम से भक्तों के लिए प्रवचन दिया जा रहा है। दिनांक 13-7-2020 के प्रसंग में उन्होंने कहा कि जब भरत जी श्री राम को लौटाने के लिए प्रयत्न कर रहे थे तब उनके साथ जाबालि नामक एक मंत्री भी आया था। जिसने भगवान को लौटाने के लिए असत्य एवं नास्तिक पूर्ण बातें कही। जो भगवान को अप्रिय लगा। भगवान ने कहा आपके बताए मार्ग से चलने पर प्रथम मैं स्वेच्छाचारी हो जाऊंगा। उससे समस्त जगत ही स्वेच्छाचारी हो जाएगा। क्योंकि राजाओं की आचरण के अनुसार ही प्रजा का आचार होता है। सत्य और न्याय का पालन ही राजाओं का सनातन धर्म है। अतः राज्य सत्य स्वरूप है, और संपूर्ण लोक शक्ति मेंं ही प्रतिष्ठित है। देवताओं और ऋषियों ने सदा सत्य का आदर किया है।

सत्यवादी व्यक्ति अक्षय लोक प्राप्त करता है। सर्प के समान असत्य बोलने वाले से लोग डरते हैं। जगत में सत्य ईश्वर के तुल्य हैं। सदा सत्य के आधार पर ही धर्म स्थित है। सत्य से बढ़कर परम पद भी नहीं। मैं सत्य प्रतिज्ञ हूं, और सत्य की शपथ खाकर पिता का सत्य पालन स्वीकार कर चुका हूं। अतः मैं पिता के आदेश का पालन अवश्य करूंगा। जो व्यक्ति प्रतिज्ञाभ्रष्ट हो जाता है। उसके दिए हुए अन्नजल देवता भी स्वीकार नहीं करते। पृथ्वी, कीर्ति, यश और लक्ष्मी—ये सब सदा सत्य पुरुष के पास रहते हैं। श्री राम ने फिर जाबालि से कहा कि आपने वेद विरुद्ध मार्ग का आश्रय लिया है। मेरे पिताजी आपको अपना मंत्री बना लिया, इस कार्य की मैं निंदा करता हूं। जैसे चोर दंडनीय होता है, वैसे ही शास्त्र विरुद्ध मार्ग का अवलंबन करने वाला भी दंडनीय होता है।

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