श्री राम दरबार में कुत्ते को मिला न्याय -श्री स्वामी जी

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Sri Swami jee maharaj

हुलासगंज लक्ष्मी नारायण मंदिर के श्री स्वामी रंग रामानुजाचार्य जी महाराज का प्रवचन इन दिनों सोशल मीडिया व समाचार पत्र के माध्यम से भक्तों के लिए प्रवचन चल रहा है।स्वामी जी महाराज प्रवचन के प्रसंग में कहा की भगवान्  श्री राम प्रातः काल संध्या वंदन आदि नित्य  कर्म करके प्रजा जनों के विवाद का निपटारा करने के लिए वेद वेत्ता ब्राह्मणों, पुरोहित वशिष्ठ तथा कश्यप मुनि को साथ राज्य सभा में उपस्थित हुए। वह न्याय आसन पर बैठ गये ।वहां मंत्री, विद्वान्, नीतिज्ञ, राजा तथा अन्य सभासद भी उपस्थित थे। भगवान् श्री राम ने शुभ लक्षण संपन्न लक्ष्मण जी से कहा सुमित्रानंदन वीर! तुम बाहर निकल कर देखो कि कौन-कौन से कार्यार्थी उपस्थित हैं। प्रभु की आदेश पाकर लक्ष्मण जी राज भवन से बाहर निकले। उन्होंने देखा राज द्वार पर एक कुत्ता खड़ा था। जो उन्हीं की ओर देखता हुआ बार-बार भौंक रहा था ।

लक्ष्मण जी ने  उससे पूछा तुम निर्भय हो कर बताओ तुम्हारा क्या काम है। लक्ष्मण के वचन सुनकर कुत्ते ने कहा जो समस्त भूतों को शरण देने वाले क्लेश  रहित कर्म करने वाले और जो भय के अवसरों पर भी अभय देते हैं उन भगवान् श्री राम के समक्ष अपना काम बता सकता हूं। लक्ष्मण ने श्री राम के पास आकर कहा कि एक  कुत्ता कार्यार्थी बनकर द्वार पर खड़ा है। आपके पास आकर ही कुत्ता अपना दुख सुनाना चाहता है। प्रभु की आज्ञा से लक्ष्मण जी कुत्ते को श्री राम के  पास बुलाया । कुत्ते की ओर देखकर श्री राम ने कहा तुम्हें जो भी कहना है हमें सामने कहो। कुत्ते का मस्तक फटा हुआ था श्रीराम ने कुत्ते से कहा कि तुम निर्भय हो कर बताओ आज तुम्हारा कौन सा कार्य करूं? कुत्ते ने कहा कि सर्वार्थ सिद्ध नाम के प्रसिद्ध एक भिक्षुक  आज अकारण मुझ पर प्रहार किया है। वह कुत्ते की बात सुनकर श्रीराम ने सर्वार्थ सिद्ध नामक भिक्षुक  ब्राह्मण को बुलवाया और उनसे श्रीराम ने पूछा कि आप इस कुत्ते को सिर पर प्रहार किया है । इसका क्या कारण है? सर्वार्थ सिद्ध ने श्री राम से कहा कि मैं भिक्षा के लिए जा रहा था। कुत्ता बीच रास्ते पर खड़ा था।

मैंने इसे बार-बार कहा कि रास्ते से हट जाओ । परंतु यह कुत्ता सड़क के बीच में बेढंगे  खड़ा हो गया। मैं भूखा था मुझ में क्रोध आ गया उससे प्रेरित होकर मैंने इसे इसके सिर पर डंडा मार दिया। अपराधी हूं आप मुझे  दंड दीजिए। श्रीराम ने सभासदों से उसे दंड देने के लिए पूछा कि इस ब्राह्मण को क्या दंड दिया जाए? ब्राम्हण के संबंध में कोई कुछ नहीं कहा भगवान् ने कुत्ते से पूछा  कि इन्हें क्या दंड दिया जाये। कुत्ते ने कहा की कालंजर में एक मठ है। इस ब्राह्मण को इस मठ का कुलपति (महंत) बना दीजिए। कुत्ते की बात सुनकर भगवान् श्रीराम ने उस अपराधी ब्राम्हण को हाथी पर चढ़ाकर उसे मठ  भेज दिया।मंत्रीयों ने श्री राम से हंसते हुए कहा कि ये ब्राम्हण को दंड देकर मठाधीश क्यों बना दिया? श्री राम ने कुत्ते से पूछा ब्राम्हण को ऐसा फल क्यों मिला? कुत्ते ने कहा कि पूर्व जन्म में मैं मठाधीश था मैं न्याय पूर्वक काम करता था। अज्ञात वश कुछ भूल हो गई होगी। उससे मुझे कुत्ता का शरीर मिला । ये ब्राम्हण  तो क्रोधी  क्रूर कठोर  और लोभी है।वह  वहां गलत काम करके सात पीढ़ियों को नरक में गिरा  कर ही रहेगा इसलिए उसे मठ का महंत  बना दिया।

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