स्वधर्म का पालन करने से मिलती है विशेष शक्ति— श्री स्वामी जी

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Sri swami maharaj

महाराज श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर हुलासगंज के श्री स्वामी रंग रामानुजाचार्य जी महाराज इन दिनों सोशल मीडिया एवं समाचार पत्र के माध्यम से सुयोग एवं शिक्षाप्रद बातें का उपदेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपने अपने धर्म का पालन करने से मानव में विशेष शक्ति स्वयं आ जाती है। उन्होंने कथा के माध्यम से बताया की एक कौशिक नाम के ब्राम्हण जो शास्त्र उपनिषदों के ज्ञाता थे। वह 1 दिन तपस्या के लिए बैठे थे तभी एक बगुली ने उन पर विष्ठा कर दिया। महात्मा को क्रोध आया उन्होंने बगुली के तरफ देखा। इनके देखने मात्र से बगुली जलकर भस्म हो गई। महात्मा को लगा की मैं शक्तिशाली हूं। एक दिन भिक्षा मांगने एक ब्राह्मण के घर गए। ब्राह्मणी पतिव्रता थी। जब भीक्षा लेकर आ रही थी, तभी उसके पति भूखे प्यासे घर लौटे।

वह भिक्षा देना छोड़ कर अपने पति की सेवा में लग गई। इधर महात्मा क्रोधित हो रहे थे जब भिक्षा लेकर आई तो बोले ब्राह्मणी तुम मेरे प्रभाव को नहीं जानती हो। मैं पूरे संसार को जला सकता हूं। ब्राम्हणि बोली कि मैं बगुली नहीं हूं, जिसे आप भस्म कर देंगे। मैं पतिव्रता स्त्री हूं। आपका क्रोध मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। फिर भी मैं आप का अनादर ना करके क्षमा मांग रही हूं। धर्म का सही स्वरूप जनकपुर का एक धर्म व्यास जानता है महात्मा को बड़ा आश्चर्य हुआ की मैं वन में अकेला था फिर भी यह बबली के बारे में कैसे जान गई। महात्मा ऐसी शक्ति को देखकर जनकपुर जाने को उत्सुक हो गए। वह जनकपुर धर्म व्याध के पास पहुंचे धर्म व्याध कसाईखाने में बैठकर सूअर भैंस आदि पशुओं का मांस बेच रहा था। धर्मव्याध माता पिता की सेवा से विशेष शक्ति प्राप्त कर लिया था। उसके प्रभाव से वह परोक्ष की बातों को जान लेता था। इसलिए वह जान गया कि यहां एक ब्राह्मण आए हैं। अपनी दुकान से �

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