पातिव्रत्य धर्म का शिक्षा लेनी है तो महारानी सीता से लें- श्री स्वामी जी महाराज।

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श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर हुलासगंज में इन दिनों श्री स्वामी जी महाराज का समाचार पत्र व अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से प्रवचन चल रहा है। स्वामी जी महाराज ने अपने प्रवचन प्रसंग में कहा कि यदि पातिव्रत्य धर्म का पालन सीखना है, या पतिव्रत धर्म क्या होता है यह जानना है, तो महारानी सीता से शिक्षा लेनी चाहिए। वही राम वन के प्रसंग में माता अनसूया ने जो सीता को उपदेश किया उसे उन्होंने विस्तृत रूप से वर्णन किया। उन्होंने कहा की अनसूया ने सीता से कहा तुम धर्म पर ही दृष्टि रखने के कारण अन्य परिवारों को छोड़कर वन में अपने पति श्री राम का अनुसरण कर रही हो।

अनसूया ने सीता को पातिव्रत्य धर्म का उपदेश देते हुए कहा कि पति नगर में रहे अथवा वन में, भला हो अथवा बुरा, धनहीन हो अथवा धनवान, आचरणहीन हो या सदाचारी, उत्तम स्वभाव वाली नारियों के लिए वही देवता है। नारियों के लिए पति से बढ़कर कोई हितकारी नहीं है । इस लोक तथा परलोक में सुख देने वाला पति ही होता है । जो नारी अपने पति पर शासन करती है, पति की आज्ञा के अनुसार नहीं चलती , वह धर्मभ्रष्ट होकर संसार में अपयश प्राप्त करती है। तुम्हारे समान लोक और परलोक को जानने वाली साध्वी नारियां स्वर्ग प्राप्त करती है। तुम श्री राम की सेवा में लगे रहो।

सीता ने अनुसूया से कहा की हे देवि! आप संसार के स्त्रियों में सबसे श्रेष्ठ हैं। आप के मुख से ऐसी बातों को सुनना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। नारी का गुरु (पूज्य) पति ही है। यह बात मुझे पहले से ही विदित है । श्री रघुनाथ जी परम दयालु, जितेंद्रिय, धर्मात्मा और माता-पिता के समान प्रिय हैं। मैं पति के साथ निर्जन वन में जब आने लगी थी तो उस समय मेरी सास कौशल्या ने मुझे जो उपदेश दिया था। वह मेरे हृदय में आज भी अंकित है।

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