उत्तम व्यक्ति बनने के लिए शीलवान् बने -श्री स्वामी जी महाराज

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श्री स्वामी जी महाराज

हुलासगंज लक्ष्मी नारायण मंदिर के स्वामी १००८श्री रंग रामानुजाचार्य जी महाराज का इन दिनों सोशल मीडिया व समाचार पत्र के माध्यम से भक्तों के लिए प्रवचन चल रहा है। श्री स्वामी जी महाराज अपने प्रवचन में कहा की मनुष्य को शीलवान् होना चाहिए। जिस पुरुष में उत्तम शील रहता है। उसके पास धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मी स्थिर होकर रहती है। एक दिन धृतराष्ट्र ने सुना कि दुर्योधन बहुत दुबला होता जा रहा है ।

धृतराष्ट्र ने दुर्योधन से कहा कि बेटा तुम्हें महान ऐश्वर्य प्राप्त है। तुम्हारे सभी भाई, मित्र और संबंधी तुम्हारे सेवा के लिए उपस्थित हैं। तुम्हारे पास उत्तम घोड़े हैं रथ हैं इत्यादि सारे साधन हैं ,फिर भी तुम दुर्बल क्यों होते जा रहे हो । दुर्योधन ने कहा पिताजी युधिष्ठिर के महल में दसहजार महामनस्वी स्नातक ब्राम्हण प्रतिदिन सोने की थाली में भोजन करते हैं । उनकी दिव्य सुशोभित सभा भवन है । उनके अनेक प्रकार के घोड़े रथ आदि कुबेर के समान विशाल ऐश्वर्य को देख कर मैं निरंतर शोक में डूबा जा रहा हूं । धृतराष्ट्र ने कहा बेटा युधिष्ठिर के पास जैसे संपत्ति है। वैसी या उस से बढ़कर राजलक्ष्मी को यदि तुम प्राप्त करना चाहते हो ,तो शीलवान् बनो ।

शीलगुण के द्वारा तीनों लोकों पर विजय पायी जा सकती है। शीलवानों के लिए संसार में कुछ भी असाध्य नहीं है । धृतराष्ट्र ने कहा पहले सभी राजा शीलवान् और दयालु थे मानधाता ने एक दिन में जनमेजय ने तीन दिनों में और नाभा ने सात दिनों में शीलवान् होने के कारण संपूर्ण पृथ्वी के राज प्राप्त कर लिए थे। दुर्योधन ने पुनः अपने पिता से कहा मैं शील का तत्व जानना चाहता हूं। शील जिस तरह प्राप्त हो सके वह उपाय मुझे बताइये।

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