समाज को सुव्यवस्थित बनाने के लिए भगवान का अवतार होता है— श्री स्वामी जी महाराज

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1975
Hulasganj Mandir

धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे।। हुलासगंज लक्ष्मी नारायण मंदिर के श्री स्वामी रंग रामानुजाचार्य जी महाराज ने जन्माष्टमी पर विशेष चर्चा करते हुए कहा कि धर्म के संस्थापन एवं समाज को सुव्यवस्थित करने के लिए भगवान का अवतार होता है। उन्हें कहा कि चौरासी लाख प्रकार के शरीरों में मानव शरीर सर्वोत्तम है।

मानव शरीर जीवात्मा को परमात्मा तक पहुंचा देने का प्रधान साधन है। इसीलिए देशों ने इसे मुक्ति का द्वार कहा है। मानव में यह क्षमता है कि वैदिक धर्म मार्ग का अनुसरण कर लौकिक सात्विक सुख का अनुभव करता हुआ परमात्मा का सानिध्य प्राप्त कर सकता है। जैसे भौतिक दृष्टि से राष्ट्र को समुन्नत बनाने के लिए राजनीति है, वैसे आध्यात्मिक सुख संपन्नता के लिए वैदिक धर्म नीति है।

त्रिकालदर्शी ऋषियों ने मानव चेतना को समुन्नत बनाने के लिए वैदिक धर्म का प्रचार प्रसार किया है। संपूर्ण विश्व का हित वैदिक धर्म में ही निहित है। वैदिक धर्म विश्व का आधार है। जब लौकिक भोग प्रधान दानवों के द्वारा वैदिक धर्म क्षतिग्रस्त कर दिया जाता है, और सनातन वैदिक धर्मावलंबीयों के सारे धार्मिक कृत्य बंद कर दिए जाते हैं, वैसी स्थिति में जगत के अंदर बुरी तरह से दूर्व्यवस्था फैल जाती है। उसका परिणाम होता है कि दैवी संपदा वालों का जीवन अत्यंत दुखमय हो जाता है। उस समय जगन्नियंता परम पिता परमेश्वर सौशील्य वात्सल्य सौलभ्याधि गुणों के कारण भक्तों की आर्त पुकार पर दिव्य धाम वैकुंठ से लीला विभूति में आकर सनातन वैदिक धर्म की मर्यादा को स्थापित करते हैं।

भगवान अपने आचरण और वचन इन दोनों से वैदिक धर्म की मर्यादा को बचाते हैं। लक्ष्मी नारायण मंदिर में हर वर्षों की भांति भांति इस साल भी 24 घंटा का अखंड कीर्तन का आयोजन  किया जा रहा है सोशल डिस्टेंस के साथ आश्रम परिवार के ही द्वारा अखंड कीर्तन किया जा रहा है ।

अखंड कीर्तन में बाहरी लोगों को अलाउड नहीं है हुलासगंज लक्ष्मी नारायण मंदिर में अखंड कीर्तन के समापन के बाद कृष्ण जन्मोत्सव मनाई जाएगी क्योंकि भगवान श्री कृष्ण के अवतार के समय चार ग्रह ऊंचा स्थान में थे चंद्रमा, मंगल, बुध ,और शनि। सिंह में सूरज, कन्या में बुध  ,तुला में शुक्र और शनि,  वृश्चिक बृहस्पति में राहु , मकर में मंगल, मीन   मैं बृहस्पती,वृष मेचंद्र  और केतु अतः मांस पक्ष तिथि और नक्षत्र विचार करके व्रत किया जाता है भाद्रपद कृष्ण पक्ष या सर्वमान्य है परंतु अष्टमी तिथि सतमी विद्वा ना हो अगर अष्टमी के दिन सूर्योदय काल मैं सतमी हो और रोने से पहले कृतिका हो तो उस दिन वैष्णव को व्रत नहीं करना चाहिए इस वर्ष 12 अगस्त को सूर्योदय के पूर्व से ही रात्रि 1:00 बजे कर 29 मिनट तक कृतिका है तदनंतर रोहिणी नक्षत्र आएगा उस दिन रोहिणी कृतिका विद्वा होने से भगवत भक्त वैष्णव को व्रत नहीं करना चाहिए अतः इसलिए 13-8-2020 को शुद्ध रोहिणी नक्षत्र है उसी दिन भगवत भक्त वैष्णव का श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत करना चाहिए

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