अयोध्या एवं राजा दशरथ का परिचय— श्री स्वामी जी महाराज

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Swami Ji Hulasganj

श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर हुलासगंज के पूज्य पाद श्री स्वामी रंग रामानुजाचार्य महाराज ने कहा कि कुछ ही दिन बाकी हैं, भगवान श्री राम का मंदिर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। उसी संबंध में जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविख्यात, भौतिक एवं आध्यात्मिक संसाधनों से संपन्न कौशल देश में एक अयोध्या नगरी थी, जो विवस्वान के पुत्र वैवश्वत मनु के द्वारा बनवाई गई थी। वह श्री सुदर्शन चक्र पर स्थित है।

शोभा शालिनी महापुरी अयोध्या 12 योजन (48 कोस) लंबी और 3 योजन (12 कोस चौरी) थी। सप्तपुरीओं में अयोध्या एक मोक्षदायिनी दिव्य पूरी है। वहां के 2 योजन की भूमि ऐसी थी जहां पहुंचकर किसी के लिए युद्ध करना संभव नहीं था, इसलिए इस नगर का नाम अयोध्या से प्रसिद्ध है। वहां के विशाल राजमार्ग की शोभा अपूर्व थी। संपूर्ण ब्रह्मांड विराट पुरुष परमात्मा का शरीर है। उनका हृदय भारत भूमि के अंतर्गत अयोध्या और मथुरा पुरी है। भगवान नारायण इन्हीं क्षेत्रों में अवतार लेते हैं। वहां परम निर्मल सूर्यवंश की अड़तीसवीं पीढ़ी में अज के पुत्र श्री राजा दशरथ हुए।

दशरथ वेदों के महान विद्वान, धनुर्विद्या के मर्मज्ञ तथा महान तेजस्वी थे। वे जितेंद्रिय और धर्मात्मा थे। प्रजा को सब प्रकार से सुखी रखते थे। वे दिव्य गुण संपन्न राजर्षि थे। उन्हें अपने गुणों से तीनों लोकों में ख्याति प्राप्त थी। उनके पुण्य प्रताप से ही उनके घर उनकी तीन महारानीयों से 4 पुत्र उत्पन्न हुए। जिसमें कौशल्या से राम, केकई से भरत, और सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न हुए। कालांतर में अयोध्या को गुम कर दिया गया था और बाबर ने उसका नाम फैजाबाद कर दिया था। लेकिन सत्य को प्रकाशित करने की आवश्यकता नहीं होती सत्य स्वयं प्रकाशमान होता है। अतः फिर से भगवान श्री राम अपने घर में विराजमान होने वाले हैं। सभी भक्तों से आग्रह है कि वे सब 5 तारीख को भगवान श्री राम की जय जय कार की ध्वनि करके अपने जीवन को धन्य बनाएं, और इस इतिहास के साक्षी बने।

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