श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर हुलासगंज के पूज्य पाद श्री श्री 1008 श्री रंग रामानुजाचार्य जी महाराज ने भगवान श्री राम के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि- त्रिविध ताप से पीड़ित जगत के समस्त प्राणियों को शरण देने वाले भगवान श्रीराम हैं। शरण का अर्थ है- उपाय। सबों के जीवन की सारी समस्याओं का समुचित समाधान श्रीराम से मिलता है। उनके बिना दूसरा कोई उपाय नहीं है। कलि दावानल ने सभी उत्तम साधनों को आत्मसात कर लिया है। कलि अधर्म का मित्र है। अत एव इस समय मानव विशेष अधर्मपरायण हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप लोग दूषित विचार एवं गलत कर्म करने के लिए सतत प्रयत्नशील हैं। मानवगत कलि दोष को दूर करने वाले श्रीराम हैं। काल रूप सर्प श्रीराम से डरता है। क्योंकि राम काल के भी काल हैं। समस्त जगत श्रीराम के वश में है। वही सब के कारण, आधार एवं स्वामी हैं।
अतः हम सबों का श्रीराम के चरण कमलों में अविरल प्रेम हो- ऐसी प्रार्थना करनी चाहिए। अपने सद्गुणों से सबको आनंद देने वाले को राम कहते हैं। अंतर्दृष्टि वाले योगी गन भी जिनके दिव्य गुणों में एवं दिव्य स्वरूप में रमण करते हैं उनको राम करते हैं। जिस सत-चित आनंद स्वरूप राम में योगी गण रमन करते हैं वह राम परम ब्रह्म है। वेदों में प्रतिपाद्य परम पुरुष भगवान विष्णु जब राजा दशरथ के पुत्र रूप में आकर राम नाम से प्रसिद्ध होते हैं, तब वेद और उनके दिव्य स्वरूप एवं दिव्य चरित्रों का गान करने के लिए वाल्मीकि के मुखारविंद से रामायण रूप में परिणत हो जाता है। वही रामलला जल्द ही फिर से अयोध्या में विराज ने वाले हैं, इसलिए भगवान श्री राम नाम का संकीर्तन करते रहें।

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